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कानपुर के आत्मा राम हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप, बाहर से दवा लाने पर विवाद; 1400 की दवा 6500 में देने का दावा

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बेटी के इलाज में करीब 2.75 लाख रुपये खर्च होने का आरोप, बाहर से दवा लाने पर जबरन डिस्चार्ज कराने की कोशिश का भी दावा

शिवसेना जिलाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से की शिकायत, CMO और नोडल अधिकारी से बातचीत में अलग-अलग जवाब मिलने का दावा

कानपुर। नौबस्ता स्थित आत्मा राम हॉस्पिटल को लेकर इलाज, दवाओं की कीमत और मरीज के साथ कथित व्यवहार से जुड़ा मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के मुताबिक, बेटी के इलाज में करीब 2.75 लाख रुपये खर्च हुए। वहीं, एक इंजेक्शन जिसकी कीमत करीब 1400 से 1500 रुपये होने का दावा किया गया है, उसे अस्पताल में करीब 6500 रुपये में लगाए जाने का आरोप लगाया गया है।

मामले को लेकर शिवसेना कानपुर नगर के जिलाध्यक्ष शिवकुमार विश्वकर्मा ने मुख्यमंत्री से शिकायत किए जाने की बात कही है। शिकायतकर्ता की ओर से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से फोन पर बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी दिए जाने का भी दावा किया गया है।


बाहर से दवा लाने पर विवाद का आरोप

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इलाज के दौरान जब अस्पताल के बाहर से दवा लाने की बात कही गई तो अस्पताल प्रबंधन की ओर से आपत्ति जताई गई। आरोप है कि बाहर से दवा लाने पर मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज करने का दबाव बनाया गया।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, बाद में कथित तौर पर डिस्चार्ज किए जाने के बाद परिवार को घर पर ही इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ा। परिवार की ओर से अस्पताल के स्टाफ से घर पर इलाज जारी रखने के लिए सहयोग मांगे जाने का भी दावा किया गया, लेकिन आरोप है कि स्टाफ ने ऐसा करने से मना कर दिया।


स्टाफ को इलाज करने से रोकने का भी आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि अस्पताल के एक स्टाफ सदस्य ने घर पर मरीज का इलाज करने से इनकार करते हुए कहा कि यदि उसने ऐसा किया तो उसकी नौकरी चली जाएगी।

शिकायतकर्ता का दावा है कि अस्पताल के मालिक डॉ. विनय बाजपेई की ओर से भी स्टाफ को मरीज के इलाज के संबंध में निर्देश दिए गए थे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आना बाकी है।

1400-1500 रुपये की दवा 6500 में देने का दावा

शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों में दवा की कीमत को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। दावा किया गया है कि जिस इंजेक्शन की थोक कीमत करीब 1400 से 1500 रुपये के आसपास बताई जा रही है, उसे अस्पताल में करीब 6500 रुपये में उपलब्ध कराया गया।

शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले की जांच की मांग की है। खास तौर पर अस्पताल में दवाओं की खरीद और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही दवाओं के बिल एवं कीमतों की जांच कराने की मांग की गई है।

CMO और नोडल अधिकारी से बातचीत का दावा

मामले में शिकायतकर्ता द्वारा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से फोन पर बातचीत किए जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि बातचीत की रिकॉर्डिंग में सीएमओ और नोडल अधिकारी डॉ. रमित रस्तोगी की ओर से मामले को लेकर अलग-अलग जवाब सामने आए।

शिकायतकर्ता के अनुसार, सीएमओ ने अस्पताल में यदि गलत व्यवहार हुआ है तो पुलिस और उपभोक्ता फोरम में शिकायत करने की सलाह दी। वहीं, नोडल अधिकारी डॉ. रमित रस्तोगी ने अस्पताल से जुड़े मामले को अपने स्तर से दिखवाने की बात कही।


मेडिकल स्टोर की जांच की बात

बताया गया है कि दवाओं की कीमत और बिक्री से जुड़े आरोपों को लेकर ड्रग इंस्पेक्टर से मेडिकल स्टोर की जांच कराने की बात भी कही गई है। जांच के दौरान दवाओं की खरीद कीमत, बिक्री मूल्य, बिल और अन्य संबंधित दस्तावेजों की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से जांच की मांग की

शिवसेना कानपुर नगर के जिलाध्यक्ष शिवकुमार विश्वकर्मा ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री से शिकायत किए जाने की बात कही है। शिकायतकर्ता ने अस्पताल में इलाज, दवाओं की कीमत, मरीज को कथित तौर पर डिस्चार्ज करने के दबाव और स्टाफ को इलाज से रोकने संबंधी आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

फिलहाल पूरे मामले में आत्मा राम हॉस्पिटल प्रबंधन और डॉ. विनय बाजपेई का पक्ष सामने आना बाकी है। आरोपों की वास्तविक स्थिति स्वास्थ्य विभाग की जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।

 

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